जब मैं एक ऐसे जिद्दी इंसान के बारे मे बताने वाला हूँ, जिसने अपने जिद्द के आगे दुनिया को चौका दिया और Olympic मे 23 गोल्ड मेडल जीतकर World Record बना दिया।

Michael Phelps Biography in Hindi

जो आज तक पृथ्वी पर उसके रिकार्ड को कोई नहीं  तोड़ पाया है और इस व्यक्ति का नाम माइकल फेल्प्स है, जो दुनिया के लिए मोटिवेशन तो हैं ही, खुद के लिए भी एक मोटिवेशन हैं। इस जिद्दी इंसान की कहानी, आपको भी अपने गोल को पूरा करने के लिए जिद्दी बना देगी।


माइकल फेल्प्स का प्रारंभिक जीवन


माइकल फेल्प्स का जन्म 1985 मे बाल्टीमोर, अमेरिका मे हुआ था। माइकल ने सात साल की उम्र में ही तैरना शुरू कर दिया था और 10 वर्ष की उम्र तक, उन्होंने अपने आयु के सभी बच्चो को पीछे पछाड़ते हुए 100 मीटर के बटरफ्लाई स्विमिंग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड दिया। जिसके बाद इनकी प्रतिभा को देखते हुए इनको नैशनल बाल्टीमोर aquatic क्लब मे कोच bob बोमन के अन्डर ट्रैनिंग के लिए भेजा गया।



जब वह कक्षा 7 में थे, तभी इनको पता चला कि इनको attention deficit hyperactivity disorder नाम की बीमारी हो गई है, जिसके कारण इनको एक जगह फोकस करने में और एक जगह मन न लगना जैसी तकलीफे होने लगी, लेकिन इनकी मां और कोच बोब बाउन ने इनको मोटिवेट किया कि बेटा तुममे वो प्रतिभा है कि तुम इंटरनेशनल रिकॉर्ड बना सकते हो।



इनके बाद बाब बोमन से ट्रैनिंग लेने के बाद, माइकल ने 15 साल की उम्र मे, साल "2000" में आयोजित समर ओलिम्पिक के लिए quilify किया और 68 साल के पुराने रिकार्ड को तोड़ कर सबसे काम उम्र वाले पुरुस बने। इस इस उपलब्धि के बाद और मोटिवेशन के साथ 2004 के winter olympic के लिए तैयारी करने लगे।


माइकल फेल्प्स का कैरियर


जब माइकल 2004 के विंटर ओलंपिक में पहले परतियोगिता में 400 मीटर की स्विमिंग मे 4:08.26 (सेकंड का 26 वां हिस्सा) में पूरा कर एक वर्ल्ड रिकार्ड बना दिया। इस ओलिम्पिक मे माइकल फेल्प्स ने कुल 8 मेडल जीते जिसमे 6 गोल्ड मेडल और 2 ब्रान्ज़ मेडल जीता कर, दुनिया के सबसे अधिक गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों मे 2 स्थान बना लिया। पहले स्थान पर मार्क spiz "7 सात" गोल्ड मेडल के साथ थे, जो 1972 में रिकॉर्ड बनाया था।


इसके बाद इन्होंने सोचा कि मुझे पूरे विश्व का पहला सबसे अधिक गोल्ड मेडल जीतने वाला व्यक्ति बनना है और

 इन्होंने पब्लिक्ली anouce कर दिया की, मैं मार्क सपीज़ का रिकार्ड तोड़ूँगा और 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 8 गोल्ड मेडल लाऊंगा।इसके बाद इनके कॉम्पिटीटर और मीडिया वालों ने इनका खूब मज़ाक उड़ाया कि यह असम्भव है और मार्क स्पिज का रिकॉर्ड तोड़ा ही नहीं जा सकता है।


लेकिन ये चुप रहे और कुछ नहीं बोला।

और माइकल फेल्प्स ने अगले बीजिंग ओलंपिक की तैयारी के लिए चार साल तक 12 gante daily pratice शुरू कर दिया और वो भी साल के 365 दिन लेकिन ओलंपिक से 2 साल पहले एक दिन अचानक ट्रैनिंग के दौरान इनके दाए हाथ की कलाई फ्रैक्शर हो गया और डॉक्टर ने उन्हे कहा की आप अब अपने हाथों का उपयोग स्विमिंग में उतनी स्पीड से नहीं कर सकते हैं और इस बार का ओलंपिक का आपका सपना, सपना ही रह जाएगा।


लेकिन माइकल फिल्पस ने कहा कि नहीं मुझे तो बीजिंग ओलंपिक जितना ही जितना है और वो 8 गोल्ड मेडल जितना है, क्योंकि मैं अलाउंस कर चुका हूं। इसके माइकल फेल्प्स को एक आत्म सुझाव आया कि मैं अपने पैर का उपयोग स्विमिंग में तो कर ही सकता हूं। फिर उन्होंने कहा की अब मैं अलग तरह की प्रैक्टिस करूंगा और अपने पैरों को प्रैक्टिस कर कर के इतना तेज कर दूंगा कि कोई उतना तेज कर नहीं पाता।


यदि इस जगह पर कोई दूसरा व्यक्ति होता तो छोड़ कर पीछे हट सकता था, क्योंकि उसके पास एक बहाना था। कि वह अपने हाथों का प्रयोग स्विमिंग में नहीं कर सकता और उसे कोई कुछ बोलता भी नहीं। लेकिन माइकल फेल्प्स ने अपने गोल को आगे रखा और अपने जिद के कारण 2 साल तक ट्रेनिंग में झोक दिया और 12 घंटे डेली प्रैक्टिस किया, जिसके बाद इनके पैर से स्विमिंग करने की क्षमता इतनी बढ़ गई कि वह किसी को स्विमिंग रेस में हरा सकते थे।


इसके बाद 2008 के बीजिंग ओलिम्पिक मे पार्टिसिपेट किया और स्विमिंग के आठ अलग-अलग फॉर्मेट में 8 गोल्ड मेडल जीतकर वर्ल्ड रेकॉड बना दिया और मार्क स्पीच का 36 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। और दुनिया को गलत साबित कर दिया कि मैं सही था तुम गलत थे।


माइकल फेल्प्स के द्वारा सामाजिक कार्य


माइकल फेल्प्स को बीजिंग ओलंपिक में $ 1 मिलियन dolor का स्पॉन्सरशिप मिला था, जिससे उन्होंने माइकल फेल्प्स फाउंडेशन की सुरुआत किया, जिसमे लोगों को स्विमिंग करना और हैल्डी जीवन जीना सिखाया जाता है। इनके बाद 2012 के लंदन समर ओलिम्पिक मे 4 गोल्ड मेडल और 2 सिल्वर मेडल जीता और इसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया।


लेकिन माइकल फेल्प्स 2012 के रिटायरमेंट के बाद कुछ गलत आदतों में पड़ गए थे, जिसके कारण इनको कई बार जेल भी जाना पड़ा और इनकी मीडिया में बहुत बेइज्जती हुई। इसके बाद इनको समझ में आ गया कि मैं गलत कर रहा हूं और अब नहीं करूंगा और फिर से इन्होंने 2014 में री-ज्वाइन किया और 2 साल तक खूब मेहनत किया। इसके बाद 2016 के रियो ओलिम्पिक भाग लिया और 5 गोल्ड मेडल और 1 सिल्वर मेडल के साथ वापसी किया।


और माइकल फेल्प्स ने दिखा दिया कि इंसान कुछ भी कर सकता है। फिर माइकल फेल्प्स 2016 रियो ओलंपिक के बाद हमेशा के लिए सन्यास ले लिए। अभी तक माइकल फेल्प्स 2004 से 2016 तक चार ओलंपिक में कुल 28 मेडल जीतकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है, जिसमे 23 गोल्ड मेडल और 7 सिल्वर मेडल हैं। और इसी के साथ माइकल फेल्प्स इस पृथ्वी पहले इंसान हैं, जो ओलंपिक में इतने गोल्ड मेडल जीत पाए हैं और आज तक इनके वर्ल्ड रिकॉर्ड को कोई नहीं तोड़ पाया है।


तो दोस्तों अंत में मैं यही कहूंगा की हमें माइकल फेल्प्स एक बातें सीखनी चाहिए कि अपने लक्ष्य के लिए जुनून और जिद्द हो तो इन्सान इतिहास रचता है।


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