बिल गेट्स, जिन्होंने बचपन में ही अपने टीचर से कहा था, की मैं 30 साल की उम्र मे करोड़पति बनकर दिखाऊँगा और उन्होंने 30 साल की उम्र से पहले ही करोड़पति और 31 वर्ष की उम्र में अरबपति बनकर दिखा दिया। फिर 39 साल की उम्र में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति भी बन गए थे बिल गेट्स।

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बिल गेट्स का प्रारंभिक जीवन:

अगर आप गरीब घर मे पैदा लेते हैं, तो ये आपकी गलती नहीं है, लेकिन आप गरीब ही मर जाते हो, ये आपकी गलती है।

ये बिल गेट्स के द्वारा कहे गए शब्द है और इस quote को सच करके दिखाया है, खुद बिल गेट्स ने तो सोचने वाली बात यह है की जब वे कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं सकते।


तो आइए आज के हम इस पोस्ट मे जानेंगे, बिल गेट्स के, ज़ीरो से दुनिया का सबसे आमिर इंसान बनने की कहानी, जो आपको भी अपने जीवन मे अमीर बनने के लिए प्रेरित करेगी।


बिल गेट्स का जन्म 28 अक्टूब 1955 को seattle वाशिंगटन, अमेरिका मे मध्यवर्गीय परिवार मे हुआ था।

 बिल गेट्स को  उनके माता पिता वकील बनाना चाहते थे, लेकिन बचपन से ही इनकी रुचि कंप्युटर मे बहुत अधिक थी।


बिल गेट्स का प्रारम्भिक शिक्षा लेक साइड स्कूल से हुई है।

जब बिल गेट्स के स्कूल मे कंप्युटर प्रवाइड किया गया, ताकि बच्चे कंप्युटर चलाना सिख सके,

तभी बिल गेट्स को कंप्युटर चलाने सीखने से ज्यादा, कंप्युटर काम कैसे करती है। इसमे उनकी अधिक रुचि रहती थी।


जब बिल गेट्स 13 साल के थे तभी, स्कूल मे ही  बेसिक कंप्युटर भाषा से  टिक टैक टो नाम का एक गेम डावेलोप कर दिया था, जिससे कोई भी व्यक्ति कम्प्यूटर के साथ गेम खेल सकता था, मतलब उस गेम को खेलने के लिए दो व्यक्तियों की अवस्यकता नहीं थी।


एक दिन स्कूल मे ही इन्हे पॉल एलेन से मुलाकात हुई, जो इनसे 2 साल बड़े थे और वह बहुत ही सरमिले और शांत किस्म के इंसान थे जबकि बिल गेट्स इनके विपरीत थे, लेकिन इनमे एक बात कोम्मन थी, की दोनों को ही कंप्युटर मे बहुत रुचि थी। इसलिए ये दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त भी बन गए।


लेकिन इनके कारनामों के चलते, इन दोनों को कंप्युटर लैब मे जाने से प्रतिबंध भी लगा दिया गया था।  क्योंकि वे दोनों कंप्युटर सीखने के समय के अलावा, अपनी पढ़ाई छोड़कर सारा वक्त  कंप्युटर लैब मे ही रहते थे और कंप्युटर के सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ भी करते थे।


बिल गेट्स ने 15 साल की उम्र मे अपने दोस्त पौल एलन की मदद से इंटेल 8008 प्रोसेसर पर आधारित Traffic काउंट करने के लिए Traf-O-Data नाम के एक उपकरण बनाया। जो शहर के ट्रैफिक पैटर्न पर नजर रख सकता था। जिसके बदले इन्हे $20000 भी मिला, जो इनकी पहली कमाई थी।


बिल गेट्स ने लेक साइड स्कूल से वर्ष 1973 में पास होने के बाद, अपने माता पिता के कहने पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी मे  लॉयर कि पढ़ाई के लिए अपील किया और SATs कि परीक्षा में वे 1600 अंकों में से 1590 अंक प्राप्त किए, जिसके बाद 1973 में उनका नामांकन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हो गया, लेकिन बिल गेट्स ने lawyer के सब्जेक्ट के अलावा मैथ्स और कंप्युटर साइंस लिए, क्योंकि कंप्युटर मे उनकी ज्यादा रुचि थी और वह अधिकतर समय हावर्ड कंप्युटर सेंटर मे ही गुजारते थे।


एक दिन पॉल एलन को पॉपुलर मैगजीन नाम की एक मैगजीन मिला जिसके फ्रंट पेज पर लिखा हुआ था, कि दुनिया का सबसे पहला मिनी कंप्यूटर किट, ALTAIR 8800 बनने की घोषणा की गई थी।

फिर पॉल एलन ने इस मैगजीन को लेकर बिल गेट्स के पास गया और दिखाया, इसके बाद वे दोनों बहुत खुश क्योंकि वे  दोनों जानते थे कि यदि यह मिनी कंप्यूटर कीट में सॉफ्टवेयर डाल दिया गया, तो दुनिया में सभी इंसान इस कंप्युटर को आसानी से यूज कर सकते हैं।


यह मिनी कंप्यूटर कीट ED Roberts कंपनी के द्वारा बनाया गया था और वह कंपनी चाहती थी कि कोई व्यक्ति ऐसा सॉफ्टवेयर बनाए जिससे यह कंप्यूटर चलने लगे।


इसलिए बिल गेट्स और पौल एलेन के लिए यह बड़ी अपॉर्चुनिटी थी, इसलिए उन्होंने उस कंपनी से कांटेक्ट किया और बताया कि वे दोनों एक बेसिक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर पर काम कर रहे हैं, जो अल्टर कंप्यूटर को चला सकता है, जबकि ऐसा कोई सॉफ्टवेयर पर वे दोनों काम नहीं कर रहे थे।‌


इसके बाद हावर्ड यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर लैब में ये दोनों 2 महीने तक पूरे दिन रात मन लगाकर काम किया और एक सॉफ्टवेयर बना लिया। फिर सॉफ्टवेयर बनाने के बाद इन्होंने उस कंपनी के पास गया और टेस्ट करवाने के लिए उस कंप्यूटर में इंस्टॉल करवाया और वह कंप्यूटर चलने लगा,जिसको देखकर ये दोनों बहुत खुश हुए।


Microsoft Establised:


इसके बाद बिल गेट्स ने अपने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही ड्रॉप कर दिया, क्योंकि उन्हें अपना कंपनी शुरू करना था और वैसे भी उन्हे law की पढ़ाई मे कोई इंटेरेस्ट नहीं था, इसलिए 1975 मे हावर्ड यूनिवर्सिटी  से ड्रॉप आउट कर दिया और 1975 में ही पॉल एलेन के साथ मिलकर माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना किया, जिसके बाद माइक्रोसॉफ्ट और ed roberts  कंपनी मिलकर काम करने लगे।


लेकिन शुरुआती दिनों में इन दोनों को बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ा, क्योंकि लोग पर्सनल कंप्यूटर तो खरीद रहे थे, लेकिन इंफॉर्मेशन और सॉफ्टवेयर एक दूसरे के साथ शेयर करके खुद ही इंस्टॉल कर ले रहे थे, जिसके कारण इन्हें कोई पैसा नहीं मिल रहा था और इसलिए इनको बहुत दुख हो रहा था, क्योंकि इन्होंने अपने दिन रात की मेहनत से सॉफ्टवेयर बनाया था।


इसी को देखते हुए बिल गेट्स ने सभी कंप्युटर उपयोगकर्ता को एक लेटर लिखा और उसमे कहा की बिना किसी सोफ्टवेयर को खरीदे उसका इस्तेमाल करना मतलब किसी नए सॉफ्टवेयर को बनने से पहले ही रोक देना होगा इतना ही नहीं डेवलपर्स की हिम्मत तो तब भी टूट जाती है जब कुछ लोग ओरिजिनल सॉफ्टवेयर की कॉपी बनाने लगते हैं तब डेवलपर्स यही सोचते हैं कि हमने बेवजह ही अपना समय खराब किया और लोगों को क्वालिटी सॉफ्टवेयर बना कर दिया लेकिन इस पत्र का लोगों पर कोई असर नहीं पड़ा।


लेकिन बिल गेट्स निराश नहीं हुए और हार नहीं माना इसके बाद वह और कड़ी मेहनत करने लगे और अपने सॉफ्टवेयर को अलग-अलग भाषाओं में ट्रांसलेट करके दूसरी कंपनियों को बेचने लगे जिसके कारण इनकी कंपनी में बहुत बड़ी ग्रोथ हुई और उस समय के इनके competiter कंप्यूटर कंपनी आईबीएम, एप्पल जैसी इनकी भी कंपनी का ग्रोथ होने लगी।‌


1980 में उस समय के कंप्यूटर की सबसे बड़ी कंपनी आईबीएम ने बिल गेट के सामने प्रस्ताव रखा कि वह आईबीएम के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाए और बिल गेट्स ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। फिर

आईबीएम के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया जिसका नाम एमएस डॉस रखा, लेकिन आईबीएम बड़ी चालाकी से बिल गेट से उस सॉफ्टवेयर का पेटेंट राइट $50000 देकर खरीदना चाहता था।


लेकिन बिल गेट्स इतने भी मंदबुद्धि नहीं थे, कि वह उनकी बातों में आ जाए, वह बिजनेस चलाना अच्छी तरह जानते थे। और वह इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए क्योंकि बिल गेट्स चाहते थे, कि आईबीएम जितने भी कंप्यूटर में उनका सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें, उसका पैसा माइक्रोसॉफ्ट को मिलना चाहिए, 

इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट का टर्नओवर 1983 में 4 मिलियन डॉलर से 16 मिलियन डॉलर हो गया और इसी समय पॉल एलेन को एक गंभीर बीमारी होने के कारण वह कंपनी में उतना योगदान नहीं दे पा रहे थे, लेकिन एक साल के बाद वे धीरे-धीरे ठीक होने लगे थे।


लेकिन फिर भी पॉल एलेन ने कंपनी को छोड़ दिया। और अपने shares लेकर बाहर निकाल गए।  इसके बाद बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट का इकलौता मालिक बन गए थे और 1985 तक इनकी कंपनी का सॉफ्टवेयर 140 मिलियन डॉलर का कारोबार कर चुकी थी।


इसके बाद 1986 में माइक्रोसॉफ्ट ने अपना एक सॉफ्टवेयर लॉन्च किया जिसका नाम माइक्रोसॉफ्ट विंडो था, जिसकी मदद से लोग उस सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करके माउस के द्वारा आसानी से उपयोग कर सकते थे।

इसी समय आईबीएम ने माइक्रोसॉफ्ट के ms-dos सॉफ्टवेयर को बदलकर अपने सॉफ्टवेयर os/2 में कन्वर्ट कर दिया था, जिसके कारण बिल गेट्स के आईबीएम द्वारा जुड़े सारे कस्टमर छूट गए थे, जिसके कारण बिल गेट्स को काफी घाटा हुए।


लेकिन बिल गेट्स ने हार नहीं माना और यहां पर नहीं रुके, इसके बाद वह अपना सॉफ्टवेयर विंडो को अपडेट करने में लग गए।

फिर अपग्रेड करने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने विंडो 3.o सॉफ्टवेयर लॉन्च किया और इसकी कीमत बहुत कम राखी ताकि कोई भी competiter कंप्यूटर कंपनी इस मार्केट में टिक न सके और ऐसा ही हुआ आईबीएम का os 2 फेल हो गया।


इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने जो ऊंचाई छूना शुरू किया तो आज तक कायम है। जिसके कारण बिल गेट्स ने 30 की उम्र से पहले ही करोड़पति बनकर दिखा दिया और 31 की उम्र मे अरबपति बन गए और 39 की उम्र मे दुनिया का सबसे आमिर इंसान बनकर दिखा दिया।


आज मिकरसॉफ्ट इतना सफल कंपनी है की इनके अन्डर 150000 से अधिक एम्प्लोयी काम करते हैं और आज बिल गेट्स का नेट वर्थ 113.8 बिलियन dollor है। और इसी के साथ दुनिया का सबसे दूसरा अमीर व्यक्ति हैं।

लेकिन बिल गेट्स अपने bachho के लिए अपनी संपत्ति का सिर्फ 10 मिलियन डॉलर छोड़कर जाना चाहते हैं, क्योंकि उनके हिसाब से इतना पैसा छोड़कर जाना उनके बच्चों के लिए सही नहीं होगा, इसलिए उनका कहना है कि समाज से आया हुआ पैसा समाज मे ही जाना चाहिए।


Bill and Malinda Gates Foundation:


इसीलिए आज बिल गेट्स अपने बिल एण्ड मलिंडा गेट्स फाउंडेशन के जरिए दुनिया के गरीब लोगों की मदद करने मे लगे हैं और बिल गेट्स अभी तक अपने फाउंडेशन मे 35.8 बिलियन dollor दान मे दे दिया है, जो भारतीय रुपये मे बदला जाए तो 26 82 9415 00000 () Indian Rupee होगें।


तो दोस्तों बिल गेट्स पूरी दुनिया के लिए एक inspirational व्यक्ति हैं और हम उनसे एक चीज सीख सकते हैं कि, अगर आप गरीब घर मे पैदा लेते हो तो ये आपकी गलती नहीं है, लेकिन आप गरीब ही मर जाते हो ये आपकी गलती है।

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